स्कूली शिक्षा के सुधार की दिशा में मोदी सरकार ने उठाया स्कूली शिक्षा के सुधार में बड़ा कदम

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नई दिल्ली। स्कूली शिक्षा के सुधार की दिशा में सरकार ने एक और बड़ा कदम बढ़ाया है। इसके तहत सरकारी स्कूलों में पढ़ा रहे शिक्षकों को अब एक खास प्रशिक्षण दिया जाएगा। फिलहाल इनमें पहली से आठवीं तक के बच्चों को पढ़ाने वाले करीब 42 लाख शिक्षक शामिल होंगे। सरकार ने इसे लेकर निष्ठा ( नेशनल इनीसिएटिव फॉर स्कूल हेड्स एंड टीचर्स होलीस्टिक एडवांसमेंट) नाम की एक योजना तैयार की है। जिसे बुधवार को केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने लांच किया।

स्कूली शिक्षा में सुधार

स्कूली शिक्षा में सुधार की उम्मीद के साथ निष्ठा कार्यक्रम को लांच करते हुए केंद्रीय मंत्री निशंक ने कहा कि शिक्षकों के प्रशिक्षण की इस पहल से स्कूली शिक्षा को मजबूती मिलेगी। वैसे भी दुनिया भर में भारत को विश्व गुरू का गौरव हासिल है। इन्हीं प्रयासों के चलते यह गौरव आगे भी बना रहेगा।

भारत विश्व गुरू था, अभी भी है और आगे भी रहेगा: निशंक

उन्होंने कहा कि भारत पहले भी विश्व गुरू था, अभी भी है और आगे भी रहेगा। साथ ही हमारी कोशिश होगी, कि दूसरे देशों में पढ़ने के लिए हमारे छात्र न जाए, बल्कि इसकी जगह हम शिक्षकों को भेजेंगे। इसके लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे है।

शिक्षकों का प्रशिक्षण

सरकारी स्कूलों में पढ़ा रहे शिक्षकों के प्रशिक्षण को लेकर सरकार ने यह कदम तब बढ़ाया है, जब सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी के साथ उनके पढ़ाने की गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े होते रहते है। सरकार का दावा है कि इस प्रशिक्षण से शिक्षकों की गुणवत्ता में काफी बदलाव आएगा। साथ ही लर्निग आउटकम ( सीखने की क्षमता) के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में भी काफी सुधार आएगा।

पिछले दिनों सरकार ने प्रत्येक कक्षा के लिए एक लर्निग आउटकम तय किया था। इसके आधार पर बच्चों के शैक्षणिक स्तर का निर्धारण किया जाता है। शिक्षा के अधिकार कानून के तहत सरकार ने हाल ही में एनआईओएस के जरिए शिक्षकों के प्रशिक्षण का एक बड़ा कार्यक्रम पूरा किया है।

किताबों पर नहीं, बल्कि बौद्धिक विकास पर रहेगा फोकस

शिक्षकों के प्रशिक्षण में किताबों के बजाय बच्चों के बौद्धिक विकास पर मुख्य रूप से फोकस रहेगा। मंत्रालय की स्कूली शिक्षा सचिव रीना रे ने निष्ठा कार्यक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि इस मकसद से बच्चों को किताबी ज्ञान के साथ उसके दवाब से बाहर निकालना है।

साथ ही रटने-रटाने की पद्धति से बाहर निकालकर उन्हें वैज्ञानिक और नैसर्गिक सोच से जोड़ना भी शामिल है। शिक्षकों को काउंसलर के रूप में तैयार किया जाएगा। इसके अलावा प्रशिक्षण में सुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा, आर्टीफिशियल इंटेलीजेंस, पर्यावरण आदि विषयों पर भी फोकस रहेगा।

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