राष्ट्रहित में हम रामसेतु को बचाएंगे: केंद्र

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शुक्रवार को केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि वह राष्ट्रहित में रामसेतु को बचाएगा और अपने सेतुसमुद्रम शिप चैनल प्रोजेक्ट के तहत इस पौराणिक सेतु को कोई नुकसान नहीं पहुंचाई जाएगी। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के नेतृत्व वाली एक बेंच से केंन्द्रीय नौवहन मंत्रालय ने अपने एक हलफनामे में कहा कि बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी की ओर से सेतुसमुद्रम परियोजना के खिलाफ दायर याचिका को उनका रुख दर्ज करते हुए अब रद्द किया जा सकता है।

मंत्रालय द्वारा दाखिल हलफनामे में कहा गया कि भारत सरकार राष्ट्र के हित में रामसेतु को बिना प्रभावित किए, नुकसान पहुंचाए, सेतुसमुद्रम शिप चैनल प्रोजेक्ट के पहले तय किए एलाइंमेंट के विकल्प खोजने को इच्छुक है। केंद्र का पक्ष रखते हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल पिंकी आनंद ने कहा कि केंद्र ने पहले दिए निर्देशों का अमल करते हुए जवाब दाखिल किया है और अब याचिका खारिज की जा सकती है। स्वामी ने शीप चैनल प्रोजेक्ट के खिलाफ याचिका दायर करते हुए केंद्र को पौराणिक रामसेतु को हाथ न लगाने का निर्देश देने की अपील की थी।

2005 में मिली थी अंतिम मंजूरी

नब्बे के दशक में सेतुसमुद्रम शिपिंग केनाल नामक परियोजना की संभावना तलाशने के लिए अध्ययन को मंजूरी दी गयी थी। वर्ष 1997 में तत्कालीन सरकार ने इस परियोजना को आगे बढ़ाने का फैसला किया थाए लेकिन इसे अंतिम मंजूरी 2005 में मिली थी। एडम्स ब्रिज के नाम से भी मशहूर रामसेतु दक्षिण भारत में रामेश्वरम के निकट पामबन द्वीप से श्रीलंका के उत्तरी तट स्थित मन्नार द्वीप तक स्थित है। स्वामी ने धार्मिक मान्यताओं के आधार पर रामसेतु परियोजना को चुनौती दी थी और इसे राष्ट्रीय धरोहर का दर्जा दिये जाने की मांग अपनी याचिका में किया था।

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