शिवसेना ने आखिरकार माना, मंत्री पद को लेकर महा विकास अघाड़ी में हुई खींचतान

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मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में एक नई सुगबुगाहट शुरू हो रही है। पिछले दिनों महाराष्ट्र में उद्धव सरकार ने अपना कैबिनेट विस्तार किया। अब इसी कैबिनेट विस्तार से जुड़ी एक बात खुद शिवसेना सामने लेकर आई है। समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, शिवसेना ने गुरुवार को ये स्वीकार किया कि जल्द हुए कैबिनेट विस्तार के समय महाराष्ट्र की तीनों सत्तारूढ़ पार्टियों(कांग्रेस, एनसीपी और शिवसेना) के वरिष्ठ नेताओं के बीच मंत्री पद की कुर्सी को लेकर खींचतान हुई।शिवसेना ने इस बात को स्वीकार करते हुए इसपर अपनी सफाई भी दी। उनकी पार्टी की ओर से कहा गया है कि कई विधायकों को मंत्री पद नहीं मिल पाए क्योंकि संभावितों की सूची काफी लंबी थी।

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इस दौरान शिवसेना ने पुणे में कांग्रेस कार्यालय के बाहर हुए प्रदर्शन की ओर भी ध्यान आकृष्ट किया, जहां पार्टी कार्यकार्ता, विधायक संग्राम थोपटे को उद्धव कैबिनेट में शामिल नहीं किए जाने से नाराज दिखे और उन्होंने इसको लेकर भारी विरोध प्रदर्शन किया। शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना के एक संपादकीय में कहा, ‘कांग्रेस, शिवसेना के विरोध प्रदर्शन को राडा संस्कृति’ (गुंडागर्दी) कहती है, लेकिन जो थोपटे के समर्थकों ने किया वह भी ठीक वैसा ही था। यह कांग्रेस की संस्कृति के अनुरूप नहीं है।’

गौरतलब है महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने महीनों पुरानी अपनी कैबिनेट का विस्तार किया। मंत्रालय ने सोमवार को इसमें 36 मंत्रियों को शामिल किया। शिवसेना ने सामना में आगे लिखा, ‘मंत्रिमंडल विस्तार वास्तव में देरी से हुआ लेकिन यह आखिरकार हुआ। कुछ लोगों में निराशा की चिंगारियां थीं क्योंकि वो आखिरी सूची में जगह नहीं बना पाए, लेकिन संभावितों की सूची बहुत बड़ी थी।’

शिवसेना ने आगे कहा कि

शिवसेना ने आगे कहा कि विपक्षी पार्टी(बीजेपी) इस तरह की बातों से बहुत खुश हो रही होगी लेकिन यहां बताना जरूरी है कि पिछली देवेंद्र फडणवीस सरकार भी इससे अछूती नहीं थी। उसके मंत्रिमंडल विस्तार के समय भी ऐसा हो चुका है।

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